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सबकी अपनी दुनिया अलग अलग है

 ज़िंदगी सीधे चलकर तो किसी के पास नहीं आती है, है कुछ ना कुछ बात सबके पास जो उनको खाती है। सब्र टूट जाता है, गिर जाते हैं ख़्वाब किसी पतझड़ के जैसे, फिर भी आते हैं दिन बहार भी, हमेशा यूं ही आंधी नहीं आती है। खोखले मन से ना बढ़ाया करो किसी से दोस्ती का हाथ, ऐसे जबरदस्ती के मेलोजोल में ना कोई बात रह पाती है। बच बच कर चलने में कोई फ़ायदा नहीं, जितना खर्च हो जाए उतनी अच्छी है जिंदगी, वरना कोई ना कोई कसक मन में रह ही जाती है। डूबते जहाजों पर चढ़ने में भी क्या खतरा, महफूज़ किनारों में भी कैसी बे-खौफी? कश्ती एक ना एक दिन तो सबको डुबाती है। ~ ShubhankarThinks 
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अपना अपना झूठ ! विचार ७ जनवरी

सबसे आसान काम है दूसरे में कमी खोजना, किसी के झूठ को पकड़ लेना। मुझे अभी तक लगता था कि शायद मुझे कोई दिव्यदृष्टि मिली हुई है कि मैं सामने वाले के चेहरे से उसका झूठ पढ़ लेता हूं या फिर उसकी एक बात बोलने के ढंग से उसकी चाल, मंशा या उद्देश्य समझ लेता हूं। लेकिन कई साल के इस वहम के बाद मुझे समझ आया कि मुझे दूसरा कैसे दिख रहा है आसानी से, खुद के ऊपर तो मेरी दिव्यदृष्टी नहीं जा पाती, क्या ये इतना कठिन काम है? तो यह मेरा एक नया अनुभव है कि मैं अपने झूठ पकड़ने में ढील देता हूं या फिर मेरा घमंड मुझे रोकता है यह स्वीकार करने में कि मैं भी झूठ हो सकता हूं, मेरे अंदर भी ऐसे विचार उठ सकते हैं, जिनका उद्देश्य हो कोई, कोई मंशा हो, कोई वासना हो। खैर मुश्किल तो है खुद का झूठ पकड़ना, उससे थोड़ा ज्यादा मुश्किल है उसे स्वीकार करना और सबसे ज्यादा मुश्किल है सबके सामने यह स्वीकार करना क्योंकि ऐसा करने से आपकी जो छवि आपने सबके सामने बनाई है वो टूट जाती है। ऐसे में खतरा है कि आप अकेले हो जायेंगे और भीड़ का हिस्सा नहीं बन पायेंगे। भीड़ से जुड़ने का रास्ता ही यह है कि दूसरा गलत मैं सही, अब जब आप खुद ही अपने झूठ...

छोड़ना मत जब तक बकवास ना हो जाये ! 21/12/2022

जिंदगी बड़ी बनाने के चक्कर में टाइम पास ना हो जाये दो चार बातें ऐसी भी हो जिनमें कुछ ख़ास हो जाये। रास्ते हैं कि ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेते हैं, लोग रुकते ही नहीं जब तक बदन साथ ना खो जाये। बेहोशी में गुज़र जा रही है ये उम्र सारी, जागेंगे नहीं, जब तक मौत नज़दीक होने का अहसास ना हो जाये दुनियादारी, अदाकारी रखना अंदरूनी दायरे से बाहर, ख़बरदार, कहीं रूह भी चलती लाश ना हो जाये। पकड़ना हर बार तुम अपने रूह को भीड़ के बीच में से, कहीं जनम से ही पास थी वो मिठास भी ना खो जाए। चीज़ें छूट जायेंगी आहिस्ता आहिस्ता ख़ुद ब ख़ुद, तुम जल्दबाजी मत करना, जब तक बक़वास ना हो जायें।

आख़िरी किनारा ! 16 July 2022

 थमा होगा कोई थक कर किसी दौड़ से, शायद कोई आख़िरी किनारा ना होगा। आँखें मूँद कर बैठे हैं जो भी, उनके लिए बाकि अब कोई नज़ारा ना होगा। जीतने के बाद भूल जाये जो जमीं भी, ऐसा तो नहीं कि वो कभी हारा ना होगा। तसल्ली होगी नहीं कभी ज्यादा कमाने से, और अगर कमाये ही ना तो गुज़ारा ना होगा। जो डूबे हैं गम में और जिसमें महबूब हैं मुज़रिम, उन्हें ग़लती से भी इश्क़ दुबारा ना होगा। जो घूम रहे हैं अभी तक अपनों की तलाश में, उनके पास ख़ुद का कोई सहारा ना होगा। ये दुनिया बड़ी ज़ालिम है मेरे दोस्त, यहाँ आपका चुप रहना भी गवारा ना होगा। खिल सकते थे वो सब मुरझाये हुए फूल, उनको तबियत से किसी ने कभी सँवारा ना होगा। मुट्ठी में भर लो चाहे जितने भी पत्थर या मोती, जब जाओगे यहाँ से तो कुछ तुम्हारा ना होगा। ज़िन्दगी है अभी यहीं इसी वक़्त, ये पल जो अभी है फिर दुबारा ना होगा। ©ShubhankarThinks

कुछ क्षण ऐसे भी आते हैं ! 10 May 2022

 कभी कभी घिर जाते हैं हम गहरे किसी दलदल में, फँस जाते हैं जिंदगी के चक्के किसी कीचड़ में, तब जिंदगी चलती भी है तो रेंगकर, लगता है सब रुका हुआ सा। बेहोशी में लगता है सब सही है, पता नहीं रहता अपने होने का भी, तब बेहोशी हमें पता नहीं लगने देती कि होश पूरा जा चुका है। ठीक भी है बेहोशी ना हो तो पता कैसे लगाइएगा की होश में रहना क्या होता है, विपरीत से ही दूसरे विपरीत को प्रकाश मिलता है अन्यथा महत्व क्या रह जायेगा किसी भी बात का फिर तो सही भी ना रहेगा गलत भी ना रहेगा सब शून्य रहेगा। बेहोशी भी रूकती नहीं हमेशा के लिए कभी आते हैं ऐसे क्षण भी जब एक दम से यूटूर्न मार जाती है आपकी नियति, आपको लगता है जैसे आँधी आयी कोई और उसने सब साफ कर दिया, बेहोशी गिर गयी धड़ाम से जमीन पर, आपसे अलग होकर। अभी आप देख पा रहे हो बाहर की चीजें साफ साफ, आपको दिख रहा है कि बेहोशी में जो कुछ चल रहा था वो मेरे भीतर कभी नही चला। जो भी था सब बाहर की बात थी, मैं तो बस भूल गया था खुद को बेहोशी में, ध्यान ना रहा था कि सब जो चल रहा था कोई स्वप्न था। खैर जो भी था सही था, जैसी प्रभु की इच्छा, जब मन किया ध्यान में डुबो दिया जब म...

जीवन है एक खोखलापन ! 28 मार्च 2022

एक समय आता है सबके जीवन में जब आपको दिखेगा अपने अंदर का खालीपन, जब आपको दिखेगी सारे संसार की निरर्थकता, यह कोई शाब्दिक घटना नहीं है, अगर आप जोड़ रहे हैं इसे खुद से तो यह भूल होगी आपकी, यह घटना अचानक घटेगी, जब आप किसी क्षण पूरे खाली होंगे। आपको दिखेगा अपना खालीपन अंदर का और बाहर का सारा बोझ बिल्कुल अलग अलग, आप देख पाओगे बाहर का सारा नाटक, उस घड़ी तुम भी ना रहोगे तब केवल खालीपन हावी होगा। बहुत बार लगेगा आपको की कुछ कमी है, कुछ चीज अधूरी है, आप भाग भाग खोज लाते हो उसे भरने के तरीके, वो तरीके बड़े सुगम हैं, सब यही करते हैं  आपके खोखलेपन के अलावा हर एक दूसरी चीज है वो भराव, जो आपको हर बार सुगमता देगी इस खोखलेपन से आँखें मूंद लेने की। आपको हर बार लगेगा जैसे सब भरा पूरा हो गया कोई कमी है ही नहीं, हर बार किसी क्षण ये खोखलापन उतरेगा और आप फिर कोई उपाय खोज लोगे इससे बचने का। धीरे धीरे आप ज्यादा और ज्यादा बेहोश होते जाओगे,  आप फंस जाओगे पूरे के पूरे इस संसार के भंवर में, यही है माया , आसान है उसमें फँस जाना, कठिन है जागकर खालीपन को देखना। क्योंकि सब खो देना पड़ता है इसे देखने के लिए। कुछ तरक...