जिंदगी बड़ी बनाने के चक्कर में टाइम पास ना हो जाये दो चार बातें ऐसी भी हो जिनमें कुछ ख़ास हो जाये। रास्ते हैं कि ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेते हैं, लोग रुकते ही नहीं जब तक बदन साथ ना खो जाये। बेहोशी में गुज़र जा रही है ये उम्र सारी, जागेंगे नहीं, जब तक मौत नज़दीक होने का अहसास ना हो जाये दुनियादारी, अदाकारी रखना अंदरूनी दायरे से बाहर, ख़बरदार, कहीं रूह भी चलती लाश ना हो जाये। पकड़ना हर बार तुम अपने रूह को भीड़ के बीच में से, कहीं जनम से ही पास थी वो मिठास भी ना खो जाए। चीज़ें छूट जायेंगी आहिस्ता आहिस्ता ख़ुद ब ख़ुद, तुम जल्दबाजी मत करना, जब तक बक़वास ना हो जायें।