हमारी अधिकतम जीवन ऊर्जा नियंत्रण में समाप्त हो जाती है, आप लोगों को, चीजों को, परिस्थिति को, व्यवस्था को अनेकों उपाय से नियंत्रित करना चाहते हो। ये प्रयास पूरे जीवन भर होता है, नियंत्रण कभी पूर्ण नहीं हो पाता है मगर आप स्वयं के लिए क्रोध, घृणा, दुख, अहंकार और मानसिक अवसाद अवश्य उत्पन्न कर लेते हो। फिर एक दूसरी यात्रा प्रारंभ हो जाती है, जो वासना आपने दूसरों को नियंत्रित करने के चक्कर में स्वयं के लिए बना ली हैं, अब आप उन सबको भी नियंत्रित करने में लग जाते हो। इस प्रकार से आप अपने ही जाल में स्वयं फंस कर रह जाते हो। ~ #ShubhankarThinks