दृश्य: सरकारी रोडवेज बस अड्डा, जहाँ आपको ढ़ेर सारी बस के आने जाने के बीच दफ़्तर ढूढ़ने के लिये आँखों में उतनी ही फुर्ती चाहिए, जितना कि किसी सिक्योरिटी पर्सन को चलती हुई गाड़ी का नंबर पढ़ने में लग जाती है। ख़ैर दफ़्तर की ओर चलते हैं, जिसे बाहर से देखने पर प्रतीत होगा कि जैसे कोई दरवाजा ही नहीं है मगर नज़दीक जाने पर आपको वहाँ इमरजेंसी डोर का उचित उपयोग दिखेगा। बस फर्क इतना है इस दरवाजे का प्रयोग बाहर भागने के लिए नहीं अंदर आने के लिए किया जा रहा है। उस कोठरी नुमा काउंटर को बनाते वक्त वातारवरण का विशेष ध्यान रखा गया है, जैसे कि सर्दी के बुखार से पीड़ित व्यक्ति को उचित तापमान मिल पायेगा इसलिए पंखा , रोशनदान और टीन की चादर का प्रयोग किया गया है। कोई अनावश्यक वहाँ खड़ा होकर समय व्यतीत ना करे, उसके लिए विधुत बल्ब और ट्यूब लाइट जैसी चीजों को निषेध किया गया है। खैर हम कहाँ अभी भौतिक सुंदरता की बातें कर रहे हैं! बात करते हैं वहाँ के कर्मचारियों की, एक महिला जिसके विषय में अगर काल्पनिक कहानी बताऊँ तो सरकारी विभाग के लोगों ने उसके भोलेपन का फायदा उठाकर जबरन फॉर्म भरवा लिया था और तमंचे के बल पर उसको नियुक...