अभी जैसा आप सबको पता है देश में एक गंभीर समस्या चल रही है , उस समस्या का अभी तक कोई समाधान नही मिल पा रहा रोज हम अखबारों में सैनिकों के शहीद होने की खबर पढ़ते हैं ऐसी खबर पढ़कर मेरे अंदर बहुत उथल पुथल होती है समझ नहीं आ रहा आखिर ये रुकने का नाम क्यों नहीं ले रहा उसी व्यथा को मैंने कुछ शब्दों के माध्यम से लिखा है शायद कुछ लोगों को आपत्ति भी हो मेरे शब्दों पर मगर क्षमा चाहूँगा स्पष्टवादी हूँ - बड़े शौक से लोग पढ़ते हैं और नसीहत देते हैं शांतिप्रियता मनुष्यता का प्रमाण है ! ऐसे शांति पक्षधरों को आज स्पष्ट शब्दों में बोलूंगा राजनीति , कूटनीति , इतिहास सारे पन्ने खोलूंगा ! खैर राजनीति तो कल परसों की कहानी है मगर सिंधु घाटी की ये सभ्यता तो वर्षों पुरानी है जब जब शांति की शरण में कोई गया था तब तब उसकी उसकी हस्ती को शत्रु निगल कर गया था! एक बार गौर करो इतिहास पर ऐसी अनेकों कहानी हैं ! तुम खोलो तो सही महाभारत का विवरण वो पांडवों के शांति प्रस्ताव का प्रकरण दुर्योधन समस्त राज हथियाने चला था भगवान कृष्ण को भी बंदी बनाने चला था ! इतिहास पढो तुम चक्रवर्ती सम्राट...