"सभी जीवों को जीवित मान कर उनके साथ जीव जैसा व्यवहार करना।" एक अत्यन्त कठिन संकल्प है परन्तु प्रकृति में स्थिरता बनाने के लिए अत्यन्त आवश्यक है। ~ #ShubhankarThinks
फसल का कोई दाम ना मिलने पर, जब चलता है ट्रैक्टर हरी भरी फसल के ऊपर, तो हैरो के नीचे कट जाती हैं, हरी सब्जियां और उसके साथ ही कट जाते हैं, जमा पूंजी और मेहनत भी और मिट्टी में पिसकर खाद बन जाता है उसके भरोसे और हिम्मत का। फिर किसान घर ढोकर ले जाएगा! कर्ज, गरीबी और लाचारी की फसल। ~ #ShubhankarThinks
वक्त बड़ी तेजी से चल रहा है, आपके पास दो विकल्प हैं , या तो ठहर कर जीवन का आनंद लो, या फिर वक्त की चाल में चाल मिला लो| अगर बीच का रास्ता चुना तो, ना काम बचा पाओगे, ना पहचान बना पाओगे| पढ़ने गये कविता हम शेर-ओ-शायरी के दौर में, मेरी पंक्तियाँ कुचल गयीं, वाहवाही के शोर में| ~ #ShubhankarThinks
अगर व्यक्ति स्वयं को व्यवस्थित कर ले तो वह अपने जीवन की आधी समस्याएं समाप्त कर लेगा। क्योंकि अब वह स्वयं कोई समस्या नहीं है, बची हुई समस्या बाहरी हैं, अगर सभी लोग उसके जैसे बन जाएं तो बची हुई समस्या भी समाप्त हो जायेंगी। अब ऐसे संसार में सभी लोग ऊब जाएंगे, समय व्यतीत नहीं होगा तो अपने अपने सिर दीवार में मारने लग जाएंगे। कुछ लोग स्वयं को इस भौतिक संसार से मुक्त होने के लिए करेंगे आत्म हत्या। समस्याएं हैं तभी लोग जीवन के मूल्य समझ रहे हैं और उन्हें जीवित रहने का लालच है। ~ #ShubhankarThinks
अख़बार में प्रकाशित होता है, एक्सपर्ट का लेख "इस वर्ष कृषि ने अर्थव्यवस्था में इतने प्रतिशत अधिक योगदान दिया" वो लेख सभी ने शान से पढ़ा सिवाय उनके जो अभी फसल बेचकर मायूसी साथ लाए हैं। ~ #ShubhankarThinks #कृषि
जब बहता है़ पानी घर के बाहर वाली नाली में तो आमंत्रित करता है, कल के विनाश को! वही पानी जब बहता है खेत की नालियों में तो वह जन्म देता है, भू गर्भ में जीवन की नई संभावना को। ~ #ShubhankarThinks #OM 🙏
मानव स्वभाव में भौतिक विज्ञान के जीवंत उदाहरण देखे जा सकते हैं, क्रोध में एक व्यक्ति जब दूसरे व्यक्ति को अपशब्द कहता है तो वह दूसरा व्यक्ति गति के तीसरे नियम और पहले व्यक्ति के मुख से निकले शब्द प्रकाश परावर्तन का पालन करते हैं। जितने घटिया शब्द पहला व्यक्ति जितनी तीव्रता से छोड़ेगा, इतनी ही तीव्रता से दूसरा व्यक्ति मिले हुए शब्दों से भी अधिक घटिया शब्द उत्तर में छोड़ देगा। वैसे क्रोध एकांत में भस्म कर देने की चीज़ है, इसे चार लोगों के सामने प्रकट करने से आपके व्यक्तित्व की हानि होती है। ~ #ShubhankarThinks
सत्य का कोई पक्ष नहीं होता है, और वो निष्पक्ष होता है। सत्य किसी पक्ष का मित्र नहीं बन सकता, वो सबके लिए एक विपक्ष होता है। सत्य को नहीं आता है आदर से बात करना, वो बोलने में असभ्य होता है। ~ ShubhankarThinks
संविधान एक किताब है, जिसे शादी ब्याह त्योहार के मौके पर पूजा करने के लिए निकाल लिया करेंगे, ये कोई रोज पालन करने योग्य चीज थोड़े है। ~ #ShubhankarThinks
भारत में बारिश का अपना एक अलग महत्व है, ऑयली फ़ूड खाकर अपना कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के साथ साथ, घर की छत का ढलान, नई बनी सड़क की असल लागत, नाली में पानी झेलने कि क्षमता और नगरपालिका की व्यवस्था के प्रति लोगों के धैर्य आदि का भौतिक सत्यापन हो जाता है। ~ #ShubhankarThinks