शायर शायरी छोड़कर भाषण बना रहे हैं, खिलाड़ी खेल छोड़कर रोडीज में जा रहे हैं अभिनेता अभिनय छोड़कर राजनीति में आ रहे हैं राजनेता नेतागिरी छोड़कर अभिनय दिखा रहे हैं पत्रकार पत्रकारिता छोड़कर धारावाहिक दिखा रहे हैं। मंत्री जी रोटी छोड़कर सरकारी नौकरी खा रहे हैं, अस्पताल पैसे छोड़कर जिंदगी खा रहे हैं। कौन मर रहा है, किसी को क्या फ़र्क पड़ता है, अब तो ड्रग्स लेने वाले बस सुर्खियों में आ रहे हैं। बच्चे किताब छोड़कर स्मार्टफोन चला रहे हैं, मास्टर जी वॉट्सएप की मदद से नौकरी बचा रहे हैं। स्थिति विचित्र है अगर थोड़ा भी ध्यान दिया जाए, सुखी वही हैं जो इम्यूनिटी बढ़ा रहे हैं। ~ #ShubhankarThinks