जंगल जंगल भटका करूँ , मेरा कोई भव्य निवास नहीं! भूत प्रेत के बीच रहा करूँ, यहाँ इंसानों का वास नहीं| तू महलों की राजकुमारी, तुझे कठिनाई का आभास नहीं| तूने शाही महल में आराम किया है, तुझे पहाड़ों के संकट ज्ञात नहीं| तू मखमल बिस्तर पर सोने वाली, तुझे जमीन पर सोने का अभ्यास नहीं| देख पार्वती तू बात माना कर, मेरे साथ विवाह की हठ ना कर| तू सुख सुविधा की है अधिकारी, मेरी हालत देख सब बोलें भिखारी! तेरी जग में हँसाई हो जाएगी, मेरे साथ में क्या सुख पायेगी| style="display:block; text-align:center;" data-ad-layout="in-article" data-ad-format="fluid" data-ad-client="ca-pub-5231674881305671" data-ad-slot="2629391441"> मरघट में रहना खेल नहीं, दौलत में हमारा मेल नहीं| तुम्हारे घर माया की कमी नहीं, एक कौड़ी नहीं मेरे खजाने में| बात मेरी तो गौर से सुन ले, दृश्य भविष्य का एक बार तो बुन ले| तेरी सखी सहेली महलों में रहेंगी, तेरी दशा देख सब ताने देंगी| उस दिन तब तू पछताएगी, भूतों के बीच तू ना रह पायेगी| प्रेम तेरा ...