वरना अड़चनें रास्ते में अाई बहुत हैं।
ज़मीन पर गड़ाए रखना नजरें अपनी,
हरियाली के बीच में खाई बहुत हैं।
बस काम की बात से मतलब रखो तुम,
वरना किताबों में बातें बताई बहुत हैं।
गर्दिश में भी कैसे उजाले ढूंढने हैं,
मुश्किलों ने तरकीब सिखाई बहुत हैं।
सोच समझकर करो दिल्लगी किसी से,
ज़माने में मोहब्बत को लेकर लड़ाई बहुत हैं।
सबक दूसरों की गलती से भी लेते चलो तुम,
ख़ुद से सब कुछ सीखने में कठिनाई बहुत हैं।
~ #ShubhankarThinks

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