शारीरिक स्तर का प्रेम जब टूट जाता है,
तब वह खोजता है दूसरा शरीर।
मानसिक स्तर के प्रेम को खो देने के बाद,
वह अवसाद, क्रोध और शोक से भर जाता है।
आत्मा के स्तर पर प्रेम करने वाला,
रहता है सदैव उसी प्रेम में जीवन - पर्यन्त।
उपरोक्त तीनों स्तर पर उत्पन्न हुए प्रेम का
विच्छेद जब होता है तो वह योगी बनकर
स्वयं की खोज में निकल जाता है।
~ #ShubhankarThinks

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