सच हो या झूठ बस दिलचस्पी भरा हो,
किस्सा तो कोई भी सुनाया जा सकता है।
हुनर चाहिए किसी को ख़ुद में मिलाने का,
रिश्ता तो कोई भी निभाया जा सकता है।
बेशक, छोटी और भागदौड़ भरी है जिंदगानी,
कुछ वक़्त फिर भी सुकून से बिताया जा सकता है।
अगर मौकापरस्ती की लत लग गई है,
मुद्दा छोटी सी बात को भी बनाया जा सकता है।
सियासत की सूरत सब सच तो नहीं हैं,
दृश्य कोई भी हम को दिखाया जा सकता है।
पसंद आता है सब को फरेब और दिखावा,
अच्छा इंसान तो सिर्फ़ आजमाया जा सकता है।
~ ShubhankarThinks

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