मैं भगवान का आभारी हूं कि मेरा जन्म
सोशल मीडिया के स्वर्ण युग में हुआ|
जहां सभी लोग कर्त्तव्यपालन, सामाजिक
चिंतन, नीति शास्त्र, आध्यात्मिक चिंतन,
मातृ ऋण, पितृ ऋण, देश प्रेम, धर्म संवाद
जैसे गंभीर और अत्यंत आवश्यक विषयों
पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं।
जब लोग इतनी गंभीरता से इतने सभी
विषयों पर चर्चा कर रहे हैं तो ऐसे में
"वास्तविकता" और "चरितार्थ" जैसे
हल्के फुल्के शब्दों को अनदेखा तो किया
ही जा सकता है।
सोशल मीडिया के स्वर्ण युग में हुआ|
जहां सभी लोग कर्त्तव्यपालन, सामाजिक
चिंतन, नीति शास्त्र, आध्यात्मिक चिंतन,
मातृ ऋण, पितृ ऋण, देश प्रेम, धर्म संवाद
जैसे गंभीर और अत्यंत आवश्यक विषयों
पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं।
जब लोग इतनी गंभीरता से इतने सभी
विषयों पर चर्चा कर रहे हैं तो ऐसे में
"वास्तविकता" और "चरितार्थ" जैसे
हल्के फुल्के शब्दों को अनदेखा तो किया
ही जा सकता है।

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