कहने के लिए कह लो की सड़कों पर अंधी भीड़ है,
चलते फिरते हांड मांस और कुछ अधमरे से शरीर हैं,
कुछ गोरी चमड़ी में क़ैद मनगढ़ंत अमीर हैं,
कुछ काली चमड़ी वाले जगजाहिर फकीर हैं।
कुछ सम्पन्न ढांचे जिनके पास दिमाग नहीं बस शरीर हैं,
कुछ लुटे हुए कंकाल जिनके पास मरे हुए जमीर हैं।
बस कहने के लिए कह लो कि शहर में बहु भीड़ है।
चलते फिरते हांड मांस और कुछ अधमरे से शरीर हैं,
कुछ गोरी चमड़ी में क़ैद मनगढ़ंत अमीर हैं,
कुछ काली चमड़ी वाले जगजाहिर फकीर हैं।
कुछ सम्पन्न ढांचे जिनके पास दिमाग नहीं बस शरीर हैं,
कुछ लुटे हुए कंकाल जिनके पास मरे हुए जमीर हैं।
बस कहने के लिए कह लो कि शहर में बहु भीड़ है।
~ #ShubhankarThinks
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