कैलाश के उच्चतम शिखर पर,
अग्नि में तप वो कर रहा है,
कौन है वो अद्भुत-अदृश्य,
दिन-रात जिसे वो जप रहा है।
विकराल सा वो विष पिये,
शांत खुद को रख रहा है,
तीव्र जटिल और जग विनाशी,
काल मुख में भर रहा है।
महादेव ही है सबका संरक्षक,
सिद्ध इसे वो कर रहा है,
अस्त-व्यस्त केश, त्रिनेत्र धारी,
भीषण आपदा को वश में कर रहा है।
#ShubhankarThinks
अग्नि में तप वो कर रहा है,
कौन है वो अद्भुत-अदृश्य,
दिन-रात जिसे वो जप रहा है।
विकराल सा वो विष पिये,
शांत खुद को रख रहा है,
तीव्र जटिल और जग विनाशी,
काल मुख में भर रहा है।
महादेव ही है सबका संरक्षक,
सिद्ध इसे वो कर रहा है,
अस्त-व्यस्त केश, त्रिनेत्र धारी,
भीषण आपदा को वश में कर रहा है।
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