कई बार होता यह है कि हम क्रोध में आकर या फिर किसी बात को बिना जाने ही निर्णय लेने की कोशिश करते हैं|जो कई बार आपकी लड़ाई करा देता है अथवा लोगों को आपके खिलाफ करा देता है। क्योंकि आपके द्वारा गुस्से में लिए हुए निर्णय की चपेट में कई बार वो लोग भी आ जाते हैं , जो अपनी जगह ठीक होते हैं। इसलिए कोई भी बात बोलने से पहले या फिर निर्णय लेने से पहले खुद की मानसिक स्थिति को जाँच लें कहीं आप गुस्से में तो नहीं हैं।
जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए - IMG source - http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg प्रेमी अपनी प्रेमिका से - प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी! तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया है , तुम्हारा और मेरा संग तो रसायन विज्ञान में जल बनाने की प्रक्रिया है ! जैसे हाइड्रोजन नहीं छोड़ सकती ऑक्सीजन का संग, भगवान ने ऐसा रचा है ,हमारा प्रेम प्रसंग| दुविधा सुनो मेरा क्या हाल हुआ है, पूरा समय गति के समीकरणों में उलझ गया है ! कभी बल लगाकर पढ़ाई की दिशा में बढ़ता हूँ, कभी तुम्हारे प्रेम की क्रिया प्रतिक्रिया से पीछे तुम्हारी दिशा में खींचता हूँ| मेरे विचारों का पाई ग्राफ उलझ जाता है , ये Tan@ के मान की तरह कभी ऋणात्मक अनंत तो कभी धनात्मक अनंत तक जाता है ! मेरे ग्राफ रूपी जीवन में सारे मान अस्थिर हैं , मगर तुम्हर स्थान म...

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