जंगल जंगल भटका करूँ ,
मेरा कोई भव्य निवास नहीं!
भूत प्रेत के बीच रहा करूँ,
यहाँ इंसानों का वास नहीं|
तू महलों की राजकुमारी,
तुझे कठिनाई का आभास नहीं|
तूने शाही महल में आराम किया है,
तुझे पहाड़ों के संकट ज्ञात नहीं|
तू मखमल बिस्तर पर सोने वाली,
तुझे जमीन पर सोने का अभ्यास नहीं|
देख पार्वती तू बात माना कर,
मेरे साथ विवाह की हठ ना कर|
तू सुख सुविधा की है अधिकारी,
मेरी हालत देख सब बोलें भिखारी!
तेरी जग में हँसाई हो जाएगी,
मेरे साथ में क्या सुख पायेगी|
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मरघट में रहना खेल नहीं,
दौलत में हमारा मेल नहीं|
तुम्हारे घर माया की कमी नहीं,
एक कौड़ी नहीं मेरे खजाने में|
बात मेरी तो गौर से सुन ले,
दृश्य भविष्य का एक बार तो बुन ले|
तेरी सखी सहेली महलों में रहेंगी,
तेरी दशा देख सब ताने देंगी|
उस दिन तब तू पछताएगी,
भूतों के बीच तू ना रह पायेगी|
प्रेम तेरा फिर क्या कर पायेगा,
मेरा हाल देख वो भी मर जायेगा|
कोमल कोमल हाथ तेरे
भांग इनसे ना घुट पायेगी!
भूत पिसाच वहाँ नृत्य किया करें,
सर्प देख तू भी डर जाएगी|
पार्वती तू सुकुमारी है,
राज पाट की अधिकारी है|
शादी कर ले किसी राजा से,
सिंहासन पर बैठ वहीं!
मेरे साथ रहने का विचार त्याग दे,
कैलाश तेरे लिए उपयुक्त नहीं|
#ShubhankarThinks
आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें|
मेरा कोई भव्य निवास नहीं!
भूत प्रेत के बीच रहा करूँ,
यहाँ इंसानों का वास नहीं|
तू महलों की राजकुमारी,
तुझे कठिनाई का आभास नहीं|
तूने शाही महल में आराम किया है,
तुझे पहाड़ों के संकट ज्ञात नहीं|
तू मखमल बिस्तर पर सोने वाली,
तुझे जमीन पर सोने का अभ्यास नहीं|
देख पार्वती तू बात माना कर,
मेरे साथ विवाह की हठ ना कर|
तू सुख सुविधा की है अधिकारी,
मेरी हालत देख सब बोलें भिखारी!
तेरी जग में हँसाई हो जाएगी,
मेरे साथ में क्या सुख पायेगी|
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मरघट में रहना खेल नहीं,
दौलत में हमारा मेल नहीं|
तुम्हारे घर माया की कमी नहीं,
एक कौड़ी नहीं मेरे खजाने में|
बात मेरी तो गौर से सुन ले,
दृश्य भविष्य का एक बार तो बुन ले|
तेरी सखी सहेली महलों में रहेंगी,
तेरी दशा देख सब ताने देंगी|
उस दिन तब तू पछताएगी,
भूतों के बीच तू ना रह पायेगी|
प्रेम तेरा फिर क्या कर पायेगा,
मेरा हाल देख वो भी मर जायेगा|
कोमल कोमल हाथ तेरे
भांग इनसे ना घुट पायेगी!
भूत पिसाच वहाँ नृत्य किया करें,
सर्प देख तू भी डर जाएगी|
पार्वती तू सुकुमारी है,
राज पाट की अधिकारी है|
शादी कर ले किसी राजा से,
सिंहासन पर बैठ वहीं!
मेरे साथ रहने का विचार त्याग दे,
कैलाश तेरे लिए उपयुक्त नहीं|
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आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें|
Kya baat hai. Bahut khoob likha hai tumne! Zordaar, zabardast, zindabaad! :D :)
ReplyDeleteBhut hi sandaar rachna behad khubsurti se gadha hai aapne
ReplyDeleteAsli mel to yahi dikh rha sgivrashi or vealrntineday ka 👏👏👏👏👏👏
*shivratri or vealrntineday
ReplyDeleteek alag andaj men bahut hi khubsurat kavita.......
ReplyDeleteतू महलों की राजकुमारी,
तुझे कठिनाई का आभास नहीं|
तूने शाही महल में आराम किया है,
तुझे पहाड़ों के संकट ज्ञात नहीं|
waah.
Superb work
ReplyDeletePlease do follow me and give your suggestions on my poetry:)